Thursday, September 8, 2011

तवा अभी ठंडा है तवा अभी ठंडा है

तवा अभी ठंडा है, अभी कुछ पका नहीं सकते |
लकडियाँ अभी गीली हैं, अभी जला नहीं सकते || १ ||

चल पड़ो तो, रास्ता बताती है, जिन्दगी |
रुक जाओ तो, ऊपर उठाती है, जिन्दगी || २ ||

देख लो इस जिन्दगी में गम बहुत भरा है |
यूँ ख़ुशी अगर चाहो तो, उसमें क्या बुरा है || ३ ||

बंज़र हो गयी जमीं, आसमानों को उतर आने दो |
सोख लेने दो पानी, फिर से हरा-भरा हो जाने दो || ४ ||

गौर करो मुसाफिरों का, कैसे ये चलते हैं |
राह अभी छोड़ी नहीं, मंजिल पर मिलते हैं || ५ ||

मकसद यूँ जिन्दगी का कोई बदलता नहीं |
राह में रोड़े यूँ, कोई अटकाता नहीं |
ज़माने में दुश्मनी, यूँ कोई निभाता नहीं |
दोस्त न भी करो तो, दुश्मनी यूँ कोई करता नहीं || ६ ||

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