Tuesday, October 11, 2011

हकीकतों से दूर, उसने ख्यालों में

हकीकतों से दूर,
उसने ख्यालों में,
मकाँ दर मकाँ,
बना लिए,

उसे क्या पता था,
जिन्दगी कब रूठ जायेगी,
उसकी फजीयत हो जायेगी,
मिटटी यहीं पड़ी रह जायेगी,

अपने ख्यालों के लेकर,
उड़ जाएगा,
कोई नया मकाँ,
ढूढने निकल जाएगा,

इस जन्म में न सही,
अगले में तो,
ख्वाबों को जामा-ए-हकीकत पहरायेगा,
तो
वो ख्वाब-ओ-ख्वाब देखता जाएगा,

एक पूरा होते ही,
दुसरे में लग जाएगा,
एक दिन खुदा पाने का ख्वाब आएगा,
उसे भी फिर वह आसानी से हकीकत बनाएगा

1 comment:

Shri Radha Krishan Das said...

Good, if you have written it.